Anjuritesh pandey

Monday, 19 September 2016

जंग है तो जंग का मंज़र भी होना चाहिए, सिर्फ नेज़े हाथ में हैं - सर भी होना चाहिए... #UriAttacks


Posted by Unknown at 02:01 No comments:
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#sesoidiya ये 'कालिख' भी अजीब शय है साहेब। उंगली पर लगे तो लोकतंत्र की जीत और चेहरे पर लगे तो लोकतंत्र की हार। #पांडेयजी


Posted by Unknown at 01:50 No comments:
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Thursday, 15 September 2016

#मानिंदे_आबशार है फितरते-इश्क रुकता भी नही ? थकता भी नहीं ? थमता भी नहीं ?


Posted by Unknown at 23:01 No comments:
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Monday, 12 September 2016

("Sbnm") इक नदी थी दोनों किनारे थाम के बहती थी इक नदी थी कोई किनारा छोड़ न सकती थी इक नदी थी तोड़ती तो सैलाब आ जाता करवट ले तो सारी ज़मी बह जाती एक नदी थी आज़ाद थी जब झरने की तरह चट्टानों पे बहती थी इक नदी थी दिल एक ज़ालिम हाक़ीम था वो उसकी जंजीरो में रहती थी इक नदी थी इक नदी थी दोनों किनारे थाम के बहती थी इक नदी थी कोई किनारा छोड़ न सकती थी इक नदी थी...


Posted by Unknown at 07:27 No comments:
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Saturday, 10 September 2016


Posted by Unknown at 00:19 No comments:
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पुरानी होकर भी खास होती जा रही , बेशरम मोहब्बत बेहिसाब होती जा रही ।


Posted by Unknown at 00:02 No comments:
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Friday, 9 September 2016

इक नदी थी दोनों किनारे थाम के बहती थी इक नदी थी कोई किनारा छोड़ न सकती थी इक नदी थी तोड़ती तो सैलाब आ जाता करवट ले तो सारी ज़मी बह जाती एक नदी थी आज़ाद थी जब झरने की तरह चट्टानों पे बहती थी इक नदी थी दिल एक ज़ालिम हाक़ीम था वो उसकी जंजीरो में रहती थी इक नदी थी इक नदी थी दोनों किनारे थाम के बहती थी इक नदी थी कोई किनारा छोड़ न सकती थी इक नदी थी... #गुलज़ार साहब


Posted by Unknown at 23:54 No comments:
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Blue moon...


Posted by Unknown at 23:52 No comments:
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